पाकिस्तानी आतंकवाद भारत –पाक रिश्तो को ओर तल्ख करने का संकेतक


    10 जुलाई को अनन्ताग में अमरनाथ यात्रियों पर आतंकवादी हमला सीधे रूप से भारत की सभ्यता और संस्कृति पर हमला हैं ,हमारी मिली-जुली संस्कृति पर हमला हैं| रिपोर्ट में दो पाकिस्तानी आतंकवादी बताये गये हैं | आतंकवादियों के मानवविरोधी इस कायराना कुकृत्य की विश्व स्तर पर भर्त्सना हुई | भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे तल्ख रिश्तों में आतंकवाद का मुद्दा भी अहम हैं |
 नि:संदेह, भारत हमेशा मुल्क के नागरिको की बेहतरी और दक्षिण एशिया क्षेत्र की शांति के लिए प्रयासरत हैं लेकिन पड़ोसी राष्ट्र की अनेक नापाक मंसूबों से दोनों देशों के बिच सम्बद्ध कडवे होते जा रहे हैं | भारत और पाकिस्तान के सम्बन्धों को मधुर बनाने के लिए दोनों देशो को कश्मीर में चल रही प्रचंड हिंसा को समाप्त करना होगा | वहाँ राज्य सरकार द्वारा बनाई गयी योजना को दोनों मुल्कों की और से सकारात्मक ढंग से अनुसरण करने की दरकार हैं | विदेश नीति चलाने का कार्य दोनों मुल्कों में सुयोग्य राजनीतिक नेतृत्व और कूटनीतिज्ञों के जिम्मे में रहना आवश्यक हैं | दक्षिण एशिया में परमाणु बराबरी ने परम्परागत युद्ध की आशंकाओं को काफी हद्द तक सीमित कर दिया हैं लेकिन भारत और पाकिस्तान अपने छिपे उपकरणों का उपयोग एक-दुसरे को अस्थिर करने के लिए कर रहे हैं | दोनों देशों को परस्पर शांति स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध होना पड़ेगा तथा पाकिस्तान अपने देश में पल रहे आतंकवादी संगठनों पर लगाम कसनी होगी इसी में शांति की अवधारणा हैं वरन इससे परे विनाश हैं | दोनों राष्ट्रों में राजनीतिक नेतृत्व को सुरक्षा और इंटेलिजेंस एजेंसियों के मानसिक उन्माद को नजरंदाज कर समझदारी से आगे बढना होगा |भारत और पाकिस्तान दोनों मुल्कों को भाषा ,नस्ल और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को बढ़ावा देना होगा न कि धार्मिक राष्ट्रवाद को | पाक मेंइस्लामिक राष्ट्रवाद और भारत में हिन्दू राष्ट्रवाद सम्बन्धित कट्टर विचारधारा के बढने से दोनों देशों में अस्थिरता रहेगी| भारत में चल रहे गौरक्षा के नाम पर उन्मादी कुकृत्य को रोकना सरकार की बड़ी जिम्मेदारी है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसकी कड़ी निंदा की हैं |
दूसरी और पाकिस्तान को यह भी समझना होगा कि आतंकवाद एक वैश्विक समस्या हैं जिसकों लेकर भारत ने हर स्तर –हर राष्ट्र से सहयोग चाहा हैं तथा जिसमें रूस ने भी कहा कि जहां से भी आतंकवाद का खतरा आएगा वह स्वीकार्य नही होगा | चीन के द्वारा पाक को दिया जा रहा भारत विरोधी सहयोग को पाकिस्तान को नकारने की जरूरत हैं और साथ ही चीन को भी यह समझ लेना होगा की उसका आर्थिक और भूराजनीतिक महत्व भारत में छिपा हुआ हैं
पुनश्च :- दोनों मुल्को के नागरिकों को चिरस्थायी शांति की जरूरत हैं जो सम्पूर्ण विश्व को नया पैगाम देगी |

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शौकत अली खान

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