कही रह ना जाए शहादतों का बदला ...

            !  शहादत को सलाम !          
      लहू से भीगे हाथ,तिरंगे से लिपटे ताबूतों का नजारा हमारे देश की जनता के हृदय में घात से कम नही हैं | कहीं 80 साल की बूढी माँ का कान्धा तो कही 20 साल के इस देश के फौजी का जनाजा, ना जाने क्यों? मन की पीड़ा बिलखाकर सारा मुल्क अपने जाबांजो की अंतिम विदाई में नम हैं | उडी में हुए आतंकी हमले के इन कारनामों की निंदा करने से भला कौन परहेज करना चाहेगा?
        
      पाक सीमा पार कर चंद भाड़े पर पाप करने आए मानव विनाशकों ने फिर से ज्वाला का मंजर पैदा कर दिया| देश के 18 जवानो की शहादत से सारा देश आक्रोशित हैं और तो ओर पाकिस्तान की नापाक करतूतों का बदला लेना चाहता हैं| वैश्विक और क्षेत्रीय शांति को चुनौती देने वाला आतंकवाद आख़िरकार कब मिटेगा| पड़ौसी राष्ट्र पाक की मानवीयता मर चूकी हैं,जो इन नापाक करतूतों को भारत के खिलाफ करवा रहा हैं|
       
      आज दुनिया में यह साबित हो चूका कि पाक आतंकवादियो की शरणस्थली हैं साथ ही इससे निपटने के लिए भारत का सहयोग करने का आश्वासन दिया हैं जो अवश्यंभावी होना चाहिए जिसका सबसे सफल तरीका कुटनीतिक हो सकता हैं| आज वैश्विक आवाम पाकिस्तान को बताने पर जिद्दी हैं कि आतंकवाद आज स्वयं पाक को भी निशाना बनाता जा रहा हैं| आए दिनों पाक में आतंकी हमले इनका सख्त उदाहरण हैं और तो ओर पेशावर पर आतंकी हमले से सारा विश्व बा-मुलाहिजा हैं| क्रूर मिजाजी यह राष्ट्र और यहाँ के हुक्मरानों से लगता हैं की इन्होने आतंकवादी साहित्यों के पन्नो को पलटा हो तथा अपनी नीति में आतंकवाद को शामिल करने में उतारू हो |कभी कश्मीर तो कभी बलूचिस्तान का राग आलापने वाले  पाक को अंतराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने के दिन भी स्वागतरुपी हुँकार भर रहे हो|
     
       सारा देश अपने जाबांजो के बलिदान पर आंसू बहाने पर व्यस्त हैं| छल से छलनी इनके सीनों का कृन्दन आज सारे देश की जनता में क्रोध ले आया हैं| बस जरूरत हैं ! देश के वीरो की शहादत का बदला लेने की| सारा देश तब सन्तुष्ट होगा जब आतंक को करारा जवाब मिलेगा|  नेतृत्व कठोर होना चाहिए , तो 9/11 के पश्चात किसी भी दरिन्दे की हिम्मत उस राष्ट्र पर आँख उठाकर देखने की नही हुई तथा उससे परे आतंक ही आतंक, मानवविनाशी इस विचारधारा का अंत कब ?

     लहू से लुहान कश्मीर की धरती पर आँसू ग्लेशियरो से ऐसे निकल रहे हैं कि मानो भारत माता की सन्तान पर घौर संकट हो, जो सर्वव्यापक हैं|

-शौकत अली खान, तेजा की बेरी 


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