नदियों का सरंक्षण संस्थाओं के साथ जनता के द्वारा भी हो |


   उतराखंड की नैनीताल हाईकोर्ट ने सोमवार को गंगा व यमुना पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए फिर से देश में नदियों की महत्ता के बारे में बता दिया | कोर्ट ने इन्हें ‘लिविंग एन्टिटी ‘यानी गंगा यमुना को जिन्दा व्यक्तित्व करार दिया हैं तथा उसे नागरिकों की तरह ही संवैधानिक अधिकार मिले और उसे नुकसान पहुँचाने पर नागरिको की तरह दंड मिले| ज्ञात हैं कि यह विश्व में दूसरा ऐसा उदाहरण जब किसी नदी को जिन्दा मनुष्य का दर्जा मिला हो इससे पूर्व न्यूजीलैंड की संसद ने वांगनुई नदी को भी यह दर्जा दिया हैं|
हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए इसमें कोताई बरतने वाले राज्यों को सख्त सजा सुनाई जाए| साथ ही यह भी देखा जाएगा कि अदालत के इस फैसले पर कितना अमल किया जाएगा |
बेशक! अदालत का यह फैसला इन नदियों के लिए फिर से पुनर्जीवित करने का मौका ले आया हैं लेकिन इसके प्रभावी किर्यान्वन के लिए केंद्र और राज्य सरकारे दोनों मिलकर जनता के सहयोग से नदियों का सरंक्षण कर सकती हैं | राज्य सरकारे यह सुनिश्चित करे कि इन नदियों का दोहन इस तरह हो कि परिस्थितिकी को नुकसान नही पहुंचे|
  हाईकोर्ट के निर्देशानुसार गंगा प्रबन्धन बोर्ड का गठन किया जाए जिसका कार्य इन नदियों का सरंक्षण,अभिरक्षण और परिक्षण हो| केंद्र सरकार के साथ केन्द्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल का भी यह कर्तव्य हो कि वे गंगा और यमुना नदियों के आस-पास आने वाले शहरों का दौरा करे तथा उन कारणों को जानने का प्रयास करे कि जिससे कि यह नदियाँ ज्यादा प्रदूषित होती हैं | साथ ही इन नदियों के आस-पास होने वाले अतिक्रमण को हटाने के लिए राज्य सरकार इस सन्दर्भ में स्थानीय जिला प्रशासन के माध्यम से सख्त प्रयास करे जिससे कि एक निचले स्तर पर कार्यवाही हो सके |
   गंगा यमुना नदी ही नही अपितु यह एक जीवनदायनी प्रवाह हैं और वे देश की संस्कृति की प्रतीक और पर्याय हैं इसलिए इसको सहजना जनता का एक अविलम्ब कर्तव्य हैं| नदियाँ हमें आर्थिक लाभ भी प्रदान करती हैं जिससे कि इस देश की अर्थव्यवस्था सतत रूप से चलती हैं नदियों के पास में आने वाले कल-कारखानों और उधोग-धंधो के मालिकों के साथ मिलकर राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन उचित रणनीति बनाये कि कारखानों से निष्काषित अपशिष्ट का निदान एक उचित तरीके से हो तथा इनका वे नदियों के अभिभावक की तरह इनका सरंक्षण करे जिससे कि आने वाली पीढियो के लिए यह स्रोत बचा रहे |
   इन नदियों के सरंक्षण के लिए सबसे बढ़ी भूमिका जनता की हैं जिनमें स्थानीय लोगो के साथ-साथ अन्य स्थानों से आने वाले श्रद्धालुओं को सरकार एक विशेष तरीके से जागरूक करे | अतः गंगा यमुना नदियों को प्रदुषण से बचाने के लिए सबकी भागीदारी आवश्यक हैं |


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