''दिल के फफोले जल उठे सिने के से ,
इस घर को आग लगी इस घर के चिराग से ''
दुनिया में अपनी हसरत को पुनः मिजाज करने वाले मुल्क के रूप में भारत उस दौर से गुजर रहा हैं ,जिसकी विभाषिका वह स्वतंत्रता आंदोलन के पश्चात हुए भारत -पाक विभाजन में देख चूका हैं। आज हमारे नेता कौड़ी,लालच,के लिए एक समुदाय को दूसरे समुदाय लड़वाकर अपनी मुनसिब को बा-आवाजे बुलंद करने में जुटे हुए हैं,जो इस इस देश के लिए खतरा बन उभर सकते हैं । कभी मुजफ़्फ़र नगर के दंगे ,तो कभी धर्मपरिवर्तन तो कभी दादरी जैसी दिल दहलाने वाली घटनाएँ , यह घटनाएँ दिखने में तो छोटी लगती हैं लेकिन इसका परिणाम इतना भयंकर हैं कि जिसका अंदाजा भारतीय जनता नहीं लगा सकती । देश में बढ़ते राजनीतिकरण के माहौल में भारतीय जनता इस चपेट में आने के कगार पर हैं ।
हालियां घटनाओं का जिक्र करें तो ,जिनमे दादरी कांड को अपने दिल में उतारे तो हम पाएंगे की इंसानियत का हाल क्या हो रहा हैं ? यथा: किसी ने अफवाह फैला दी कि मोहम्म्द अख़लाक़ नामक ५० वर्षीय व्यक्ति के घर में गाय का मांस रखा देखा गया हैं । यह अफवाह चंद मिनटो में सैकड़ो लोगो को धर्मोन्माद से भर देती हैं और लोग अपने दिमाग़ का इस्तेमाल किये बिना मोहम्म्द अख़लाक़ के घर की ओर बढ़ जाते हैं और दूसरी ओर एक मंदिर से यह घोषणा कर दी जाती हैं, सैकड़ो लोगो की उन्मादी भीड़ तैयार कर दी जाती हैं ,पूर्वाग्रह और उन्माद की स्तिथि में विवेक खो जाता हैं । लोग अख़लाक़ के घर की तरफ चल बढ़ जाते हैं और उसे और उसके बेटे को हिंसा का निशाना बना देते हैं इस बात पर एक क्षण के लिये भी विचार किये बिना कि उन्होंने न तो तथ्य की पुष्टि की हैं और नहीं उनके पास किसी के खिलाफ इस तरह की हिंसक कारवाई करने का अधिकार ,यह इंसानियत को डुबाने वाली घटनाऐं भारतीय राजनीति का नया आयाम बनने के कगार पर हैं ।
अगले अंक में...... . . . . . . .
इस घर को आग लगी इस घर के चिराग से ''
दुनिया में अपनी हसरत को पुनः मिजाज करने वाले मुल्क के रूप में भारत उस दौर से गुजर रहा हैं ,जिसकी विभाषिका वह स्वतंत्रता आंदोलन के पश्चात हुए भारत -पाक विभाजन में देख चूका हैं। आज हमारे नेता कौड़ी,लालच,के लिए एक समुदाय को दूसरे समुदाय लड़वाकर अपनी मुनसिब को बा-आवाजे बुलंद करने में जुटे हुए हैं,जो इस इस देश के लिए खतरा बन उभर सकते हैं । कभी मुजफ़्फ़र नगर के दंगे ,तो कभी धर्मपरिवर्तन तो कभी दादरी जैसी दिल दहलाने वाली घटनाएँ , यह घटनाएँ दिखने में तो छोटी लगती हैं लेकिन इसका परिणाम इतना भयंकर हैं कि जिसका अंदाजा भारतीय जनता नहीं लगा सकती । देश में बढ़ते राजनीतिकरण के माहौल में भारतीय जनता इस चपेट में आने के कगार पर हैं ।
हालियां घटनाओं का जिक्र करें तो ,जिनमे दादरी कांड को अपने दिल में उतारे तो हम पाएंगे की इंसानियत का हाल क्या हो रहा हैं ? यथा: किसी ने अफवाह फैला दी कि मोहम्म्द अख़लाक़ नामक ५० वर्षीय व्यक्ति के घर में गाय का मांस रखा देखा गया हैं । यह अफवाह चंद मिनटो में सैकड़ो लोगो को धर्मोन्माद से भर देती हैं और लोग अपने दिमाग़ का इस्तेमाल किये बिना मोहम्म्द अख़लाक़ के घर की ओर बढ़ जाते हैं और दूसरी ओर एक मंदिर से यह घोषणा कर दी जाती हैं, सैकड़ो लोगो की उन्मादी भीड़ तैयार कर दी जाती हैं ,पूर्वाग्रह और उन्माद की स्तिथि में विवेक खो जाता हैं । लोग अख़लाक़ के घर की तरफ चल बढ़ जाते हैं और उसे और उसके बेटे को हिंसा का निशाना बना देते हैं इस बात पर एक क्षण के लिये भी विचार किये बिना कि उन्होंने न तो तथ्य की पुष्टि की हैं और नहीं उनके पास किसी के खिलाफ इस तरह की हिंसक कारवाई करने का अधिकार ,यह इंसानियत को डुबाने वाली घटनाऐं भारतीय राजनीति का नया आयाम बनने के कगार पर हैं ।
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