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    मेरी डायरी का तीसरा पन्ना , प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले मेरे भाग्यवादी मित्रो के लिए
     दोस्तों, आज हम एक ऐसे मुद्दे पर बात करेंगे जिससे निपटने के लिए एक लम्बा वक्त लगता हैं ,दोस्तों वक्त ही नही जिंदगियाँ गुजर जाती हैं, हम उससे निपट नही पाते हैं | वो हैं -‘’आत्मविश्वास’’ अजीज दोस्तों मैंने  मुख्यतः यह विषय सिविल सेवा की तैयारी करने वाले मित्रो के लिए चुना हैं | यह एक ऐसी चीज जिसके लिए लोग तरसते लेकिन इसको पाने में नाकामयाब होते हैं साथ ही अपने भविष्य को खो बैठते हैं| आत्मविश्वास, अपने व्यक्तित्व विकास में साथ निभाने वाला एक महत्वपूर्ण पहलू  हैं| जब हम प्रतियोगी परीक्षाओ की तैयारी करते है तो हमारे अन्दर सबसे बड़ी, जिस चीज की कमी होती हैं तो वो हैं ,आत्मविश्वास, दोस्तों क्यों नही हम अपने अंदर के विश्वास को जगा सकते हैं ? यह विश्वास हमे स्वयं जगाना होगा जब हम तैयारी करते होते है तो हमारे दिल और दिमाग में ऐसे अनेक ख्याल आते हैं| जिनमे- क्या हम सफल हो जाएँगे ? वो तो पूरी रात-दिन पढ़ा तो भी सफल नही हुआ? अगर हम सफल नही हुए तो हम क्या करेंगे ? हमारा तो एकेडमिक रिकार्ड खराब है ,हम तो बाहरवीं में 50 प्रतिशत अंको  से पास हुए हैं ,हमारा कहाँ  नम्बर लगेगा ? दोस्तों में यह हकीकत में सही बता रहा हूँ ऐसी घटनाए देखने को हमे हर उम्मीदवार के पास मिलते हैं |
                              मंजिल उन्ही को मिलती हैं, जान जिनके सपनों में होती हैं ,
                              बाजी पंखो से नही, हौसलों से जीती जाती हैं |
      भाग्यवादी मित्रो सफलता की प्रथम सीढ़ी असफलता हैं, असफलता से जब हमारी मुलाकात होती  हैं जब हमारे अंदर का आत्मविश्वास हमारा साथ नही निभा पाता हैं, डगमगाकर गिर जाता हैं| सिविल सेवा की तैयारी एक लम्बी और धैर्यमुखी तैयारी है| दोस्तों यह एक तैयारी ही नही हैं अपितु एक चुनौती भी हैं | दिल में यह ठान ले की, मैं तैयारी करूंगा ,मेरे सपने मेरे लिए हैं ,में कामयाब हूँगा मेरे लिए,तो सफलता निसंदेह आपके पास खुद ब खुद चलकर आएगी|
              हम देखते हैं की अकेले राजस्थान की बात करेंगे तो देखेंगे यहाँ हर साल पांच से छह लाख लोग  स्नातक की डिग्री लेकर आते हैं | क्या वे सभी अपने सपने को पूरा कर पाते हैं ?नही ऐसा कभी भी नही| मित्रों जिन्दगी बड़ी कपटी हैं जिसमे आत्मिश्वास हमसे रूठ जाता हैं जिसे हमें मनाना होगा, वरना हमे यह खा जाएगा | सबसे पहले हमारे आस-पास के परिवेश को समझे, आत्मविश्वास स्वतः ही आ जाएगा| जब तक हम खुद की कीमत नही समझेंगे ,दुनिया हमारी कीमत नही समझेंगी | हम इस दुनिया में सिर्फ असफलता और हार के लिए  नही आए हैं ,ढेर सारी प्रसिद्धी और सफलता हमारी राह देख रही हैं| आइए, जबरदस्त योजना के साथ एक ऊँचा लक्ष्य बनाएं और मन में ठान ले कि कितनी भी बाधा हो अब हम नही रुकेंगे | यह पंक्तिया में इस सच मोके पर कहना चाहुंगा कि:-
              ‘’ आत्मविश्वास में दम हो इतना,कि सफलता निकलनी चाहिए,
               दुश्मनी की, रंजिशों की, दीवार सिमटनी चाहिए|
               खुदी हो बुलंद इतनी, बाधाऐ पिघलनी चाहिए,
                मन में कुछ भी ठान लो, तकदीर बदलनी चाहिए’’
      अशेष शुभकामनाओं के साथ:-
       Shoukat Ali Khan
    (कागज,कलम,कल्पना,का कातिब)      


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