हम कब तक पिछड़ते जायेंगे ........

            हम कब तक पिछड़ते जायेंगे
कब तक हम प्रलय की गोद में पलते जायेंगे,
हम कब तक पिछड़ते जायेंगे......................

       कब आएगी कामयाबी की निशानियाँ,जिसमे हम मौज मनाएंगे,
       हम कब तक पिछड़ते जायेंगे........................................
ना संघर्ष मिटेगा,ना मैदान छूटेगा, ना ही परेशानियाँ, ये, यूँही चलते जायेंगे,
हम कब तक पिछड़ते जायेंगे......................................

       सूरज की रोशनी से जरा कहदो! हम भी कभी सूरज बन कर जियेंगे
       जिस रोज हम इशारा कर देंगे, हम कब तक पिछड़ते जायेंगे............
ना शोर मचेगा ना ही मौर नाचेगा,जिस वक्त हम कामयाब होकर लोटेंगे
हम कब तक पिछड़ते जायेंगे ..............................

ईश्वर का दिया हम कब तक मनाएंगे, कभी हमे भी स्वयं चलना पड़ेगा
हम कब तक पिछड़ते जायेंगे ...........................
        बदलो से जरा कहदो! हमने भी गरजना सिखा हैं,
        जिस वक्त गरज गये उस रोज बादलो को भी मिटना पड़ेगा,
        हम कब तक पिछड़ते जायेंगे.......................

मंजिल को पहचान राही, पथ को भी पास आना पड़ेगा,
हम कब तक पिछड़ते जायेंगे....................................

        मिट जाओ! मगर हक को मत मिटने दो,
        इन आंधियो से जरा कहदो ,हमने भी संभलना सिखा हैं,
        हम कब तक पिछड़ते जायेंगे .......................

हमने लक्ष्य भेदना सिखा हैं,इन रास्तो से जरा कहदो! हमने भी जीवन जीना सिखा हैं,
हम कब तक पिछड़ते जायेंगे ..............
  
  -शौकत अली खान,तेजा की बेरी 

  

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