आजादी के वर्षों बाद ,भारत का कौना-कौना बदल चूका हैं, परिस्थितियों को स्थितियों
में बदल दिया गया हैं,जटिल से जटिल मुद्दे सुलझ चुके हैं, लेकिन कश्मीर समस्या का
हल जस का तस पड़ा हुआ हैं| पिछले सप्ताह युवा आतंकी बुरहान की मौत के पश्चात कश्मीर
में ज्वाला का जो मंजर पैदा हुआ वह दयनीय और निराशाजनक हैं| बस! एक आतंकी को
सर्वसिद्ध करने की बहस ने कश्मीर में एक ऐसी जठराग्नि को पैदा किया कि सारा कश्मीर
त्राहिमाम से गूंज उठा| आम-आदमी परेशानी की गौद में मुहँ छिपाए हुए हैं| युवाओं का
आतंक की ओर बढ़ता रुख आने वाले भविष्य सारे विश्व के लिए किसी खतरे से कम नही हैं|
भारी-भरकम युवाओं की जनसंख्या से लदा भारतीय महामुल्क एक तरफ आतंकी बुरहान तो दूसरी
तरफ आईएएस टॉपर्स शाह फैजल और अतहर आमिर के बीच के अंतर को ढूंढने में चिंतित हैं| एक तरफ मानव सेवा और
रक्षार्थ के लिए लोकसेवक की राह अपनाई जा रही हैं तो दूसरी तरफ मानवता का दुश्मन
बन उसके विनाश पर उतारू हैं| युवाओं के इस नजरिये की पहचान करना विश्व शांति के
लिए चुनौतियों से कम नही हैं| कहीं खो ना जाए वो जन्नत का नूर जिसके सर मुकुट पर
सियाचिन की सफेदी और दिल से झेलम की आवाज हर हिन्दुस्तानी के दिल में कश्मीर प्रेम
की नई छांव खड़ी करती हैं| धर्म के नाम पर युवाओं को भटकाना धर्म के निरपेक्ष एक नई
आवाज बुलंद करता हैं| कोई भी धर्म मानव विनाश की चर्चा नही करता बस,
इन चंद राजनीतिक गलियारों से आतंक की नई परिभाषा तय हो जाती हैं| आतंक के
नाम पर छिड़ी इस धार्मिक बहस पर अंततः विराम कब तक संभव हैं| कश्मीर आतंकवादियों को
अलगाववादियों की ओर से मिल रहे समर्थन कश्मीर के लोगो के घावो को और जख्म करने से
कम नहीं हैं|
मानव जाति के इस स्वर्गमय स्थल पर अलगाववादियों और आतंकियों का डेरा कश्मीरी
युवाओं पर नजर बनाए हुए हैं| नई सोच पर निराशा के बादल इन यूपीससी टॉपर्स पर घनघोर
मंडरा रहे हैं| इनकी सोच रही होगी हमारा जीवन मानव सेवा में व्यतीत हो और हम यह
काम लोकसेवा के रूप में कर सकते हैं| युवा आतंकी बुरहान की तरह आज-कल आए दिनों अनेक
युवाओं को आतंकी संगठनों से जुड़ने की खबरे अखबारों की मुख्य लाइनों में प्रकाशित
हैं| क्यों? कभी इन्होने सोचा नही कि हमारे माता-पिता ने हमारे लिए बड़े सपने संजोए
होंगे कि हमारा बेटा हमारे मुल्क की हिफाजत में अहम भूमिका निर्वहन करेगा| बेशर्मी
की हद! एक तरफ सेना भर्ती रैली ली तो दूसरी तरफ आतंक भर्ती रैली| क्या हमने कभी
सोचा हैं कि कश्मीर में चल रही आतंक की इस अनोखी अटखेलियों से देश में अस्थिरता
पैदा होगी | अगर सोचा हैं, तो क्यों नही इस पर बड़ी गंभीर करवाई हो सकती| हुकुमतो
के दौर में राज्य सरकार और केंद्र सरकार हर दिन कश्मीर में स्थिरता की बाते कर रही
हैं| यह देश कश्मीर में दीर्घकालीन स्थिरता चाहता हैं|
निष्कर्ष:- गोला-बारूद से लदे युवाओं के बदलते नजरिय से देश चिंतित हैं| युवा वर्ग
का आतंक की ओर बढ़ता रुझान विश्व शांति को नई चुनौती हैं अर्थात: युवा सोच को आखिर
हो क्या गया हैं|
शौकत अली खान,तेजा की बेरी
E-MAIL:-alikhansk1997@gmail.com


2 Comments
कई खो ना जाये जन्नत का नूर
ReplyDeleteकई खो ना जाये जन्नत का नूर
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