किसान : आर्थिक शोषण की नीतियाँ

लहूँ की प्यासी नीतियाँ व लड़खड़ाते गणतंत्र में दबी साँसे गुनाहों रूपी लकीरें बन कर भड़का करती है और भड़कर अंगारा बन जाती है जो किसी भी सत्ता को बेनकाब करती है और करती रहे तो बेहतर रहेगा ।
दफ़न कर दो
उन नीतियों को
जो लोकतंत्र रूपी जीवन को
धिक्कार मय बना जाती हैं।
चित्र-आभार : नही जानता ,गूगल से लिया है।

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