बोल की लब आजाद है तेरे ...

नए भारत के निर्माण में महिला सशक्तिकरण की महत्वता।

आपका और हमारा समाज आज अपने विकास की चरम अवस्था पर है,बेशक लोकतांत्रिक समाज से यह आशा भी की जाती है जो पूर्ण रूप से सफल भी हो रही है लेकिन कुछ ऐसे मुद्दे है जिसको लेकर यह लोकतांत्रिक व न्यायवादी समाज चिंतित है। लाख कोशिशों व योजनाओं, किर्यान्वयन के बावजूद इसमें आशानुरूप सफलता अर्जित नही की है। जिसमें महिलाओं का मुद्दा प्रमुख है।

भारत समेत दुनियाभर में महिलाओं के सशक्तिकरण व उनके विकास के लिए बहुत सारे कामों एवं योजनाओं को लागू किया जा रहा है। दूसरी ओर आठ मार्च के दिन को महिलाओं के लिए अर्पित किया हुआ है।इस दिन दुनिया के हर कोने में महिलाओं के लिए कई कार्यक्रमों व संगोष्ठियों का आयोजन व संचालन किया जाता है। और इसी दिन को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के नाम से मनाते है।  वहीं हर देश में विशेष रूप आयोजित किए जान वाले कार्यक्रमों के जरिए महिलाओं के बहुआयामी विकास पर जोर दिया जाता है और दावे किये जाते है।

हाल ही में विश्व बैंक ने अपनी एक विस्तृत रिपोर्ट दुनिया के समकक्ष प्रस्तुत की है। विश्व बैंक की रिपोर्ट ‘वूमेन, बिजनेस एंड द लॉ 2019’  के अनुसार दुनिया लैंगिग समानता की ओर बढ़ तो रही है, लेकिन इसकी रफ्तार बहुत धीमी और निराशाजनक है। इस रफ्तार से अगले 50 साल यानी कि वर्ष 2073 तक भी महिलाओं को पुरुषों के बराबर का कानूनी दर्जा प्राप्त नहीं हो सकेगा। वर्तमान में पूरी दुनिया में केवल छह ऐसे देश हैं, जहां सही मायनों में महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार प्राप्त है। इन देशों में बेल्जियम, डेनमार्क, फ्रांस, लातविया, लक्समबर्ग और स्वीडन देश शामिल हैं।
रिपोर्ट में इन देशों को महिलाओं को पुरुषों के बराबर कानूनी अधिकारी देने के लिए पूरे 100 नंबर दिए गए हैं।
भारत की बात करे तो इस रिपोर्ट में देश को 71.25 अंक दिए हैं जो कम है।

भारत मे लिंगभेद समेत ऐसे अनेक बन्धन है जो देश की महिला आबादी को सशक्त करने में नाकामयाब हुए है।
  सदियों से ये बंधन महिलाओं को पेशेवर व व्यक्तिगत ऊंचाईयों तथा संरक्षण प्राप्त करने में अवरुद्ध करते रहे हैं |   संविधान,सरकार से लेकर सामाजिक संगठन तक में महिला सशक्तिकरण की बात होती हैं लेकिन महिलाएं अभी भी सशक्त नही हो पाई हैं | देश में प्राथमिक स्कुलो में लड़का-लडकी अनुपात तो बराबर हैं लेकिन जैसे ही यह स्थिति उच्च शिक्षा की और जाती हैं लडकियों की संख्या कम हो जाती हैं। एक अध्ययन के मुताबिक भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में रहनेवाली 56 प्रतिशत महिलाएं कुपोषण की शिकार हैं।  रायटर फाउंडेशन ने दुनिया भर के 370 विशेषज्ञों से 2014 में जो आकलन कराया, उसमें आम राय यही बनी कि महिलाओं की सबसे खराब स्थिति भारत में है। यह तथ्य किसी को इसलिए चौंकाता नहीं क्योंकि महिलाओं पर होने वाले अपराध के लगातार बढ़ते आंकड़े इस कड़वी सच्चाई को सामने नही ला पाते है ।

जिस तरह से महिलाएं देर रात तक निजी क्षेत्रों में काम करती हैं, ऐसे में महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी काफी अहम है तथा वो रोजगार संभाल नही पाती  जिसकी वजह से महिलाएं आर्थिक रूप से कमजोर होना स्वाभाविक है। भारत आज दुनिया के तेज आर्थिक विकास वाले देशो में अपनी अवस्थिति दर्ज करवाने में शुमार हैं ,पर इस विकास का लाभ आज आधी महिला आबादी को ही पहुंचा हैं|  महिला सुरक्षा के लिए जरूरी हैं कि समाज के सभी तबको की हिस्सेदारी इस दिशा में हो तथा सभी क्षेत्रो में समान महिला पुरुष अनुपात एक कारगर उपाय हैं |

महिला सशक्तिकरण का महत्व हरेक जिम्मेदार भारतीय को समझना होगा । आपके मन यह प्रश्न जरूर आया होगा कि आखिर क्या कारण है कि महिलाओं को सशक्त करने के लिए वैश्विक संगठनों के द्वारा प्रबल महत्व दिया जाता है।

महिला सशक्तिकरण का मुख्य लाभ समाज से जुड़ा हुआ है. अगर हमारा समाज देश को शक्तिशाली बनाना है,तो उसके लिए  हर भारतीय को यह समझना होगा कि महिला को भी शक्तिशाली बनाने की जरूरत है। महिलाओं के विकास का मतलब होता है कि आप एक परिवार का विकास का कार्य कर रहे हैं। अगर महिला शिक्षित होगी, तो वो अपने परिवार को भी पढ़ा-लिखा बनाने की कोशिश करेगी। जिसके चलते हमारे देश को पढ़े-लिखे नौजवान मिलेंगे।जो कि देश की तरक्की में अपनी योगदान दे सकेंगे।

घरेलू हिंसा व लैंगिक भेद एक ऐसी चीज है, जो कि किसी भी महिला के साथ हो सकती है। ये आवश्यक नहीं है कि घरेलू हिंसा केवल अनपढ़ महिलाओं के साथ ही होती है। शिक्षित महिलाएं भी इस तरह की हिंसा का शिकार होती हैं
 बस फर्क इतना होता है कि जहां पढ़ी-लिखी महिलाएं इसके खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत रखती हैं। वहीं अनपढ महिलाएं ऐसी हिंसा के विरुद्ध अपनी आवाज उठाने से डरती हैं। वहीं अगर महिलाओं का विकास किया जा सके तो हमारे देश में होने वाली घरेलू हिंसा में ना केवल कमी आएगी। बल्कि महिलाएं स्वयं को सशक्त महसूस करेंगी।

हमारे देश में लड़कियों को बचपन से ही सिखाया जाता है कि उन्हें आगे जाकर केवल घर की ही देखभाल करनी हैं। आज भी गांव में पढ़ाई करने से ज्यादा लड़कियों को घर के काम सिखाए जाते हैं। जो ना सिर्फ लड़कियों के भविष्य के लिए गलत हैं। बल्कि देश के लिए भी नुकसानदेह है। देश में अशिक्षित लड़कियां होने का मतलब है कि देश की करीब 40% आबादी का अशिक्षित होना।  अगर हम अपने देश की लड़कियों को आत्म निर्भर नहीं बननें देंगे, तो हमारे देश की महिलाएं केवल रसोई तक ही समिति रह जाएंगी।

महिला सशक्तिकरण का जो अगला सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य है, वो गरीबी से जुड़ा हुआ है। अक्सर देखा गया है कि इतनी महंगाई के जमाने में कभी-कभी, परिवार के पुरुष सदस्य द्वारा अर्जित धन परिवार की मांगों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होता है. वहीं महिलाओं की अतिरिक्त आय परिवार को गरीबी के रास्ते से बाहर आने में मदद करता है। इसलिए गरीबी को कम करने के लिए भी महिलाओं का शिक्षित होने के साथ-साथ कामकाजी होना भी जरूरी है।

कई ऐसी लड़कियां होती है, जिनमें कई प्रतिभा होती हैं. लेकिन सही मागर्दशन और शिक्षा ना मिल पाने के चलते वो अपनी प्रतिभा का इस्तेमाल नहीं कर पाती हैं. इसलिए अगर महिलाओं का सहीं से सशक्तिकरण कर दिया जाए, तो महिला अपने हुनर की पहचान कर सकेंगी. जिससे देश को भी प्रतिभाशाली महिलाएं मिलेंगे। जो कि देश के विकास के लिए कार्य करेंगी।

महिला सशक्तिकरण करने का जो सबसे प्रमुख व अहम लक्ष्य है कि महिलाओं को पुरुष के समान इस समाज में समानता देना है । देश के गांवों में आज भी हजारों महिलाएं असमानता रूपी मानसिक बीमारी से ग्रसित है ।वहीं महिला सशक्तिकरण के जरिए ऐसी महिलाओं का विकास करने पर ही जोर दिया जाता है।ताकि ये महिलाएं बोलने की आजादी का लाभ उठा सकेंगी। अपनी राय खुलकर समाज के सामने रख सकें।
भारत सरकार ने देश की महिलाओं के विकास के लिए कई सारी योजनाएं चलाई हैं।इन योजनाओं की मदद से सरकार महिलाओं की मदद कर उनका सशक्तिकरण करना चाहती हैं। जिनमें नेशनल मिशन फॉर इम्पॉवरमेंट ऑफ वूमन है
इस मिशन को महिलाओं का सशक्तिकरण करने के लक्ष्य से भारत सरकार ने शुरू किया था।15 अगस्त 2011 को शुरू किए गए इस मिशन को राष्ट्रीय और राज्य दोनों लेवल पर शुरू किया गया था।इस मिशन की मदद से महिलाओं को आत्म निर्भर बनाया जा रहा है। स्वाधार गृह योजना-इस योजना के अंतर्गत 18 वर्ष के ऊपर की आयु वाली लड़कियों को रहने के लिए आवास दिए जाते हैं।ये योजना उन लड़कियों के लिए चलाई गई है, जो कि बेघर हो गई हैं। आवास के अलावा इस योजना के अंतर्गत भोजन, कपड़े, स्वास्थ्य सुविधाएं और उनकी आर्थिक व सामाजिक सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाती है। वन स्टॉप सेंटर योजना
इस योजना की मदद से घरेलू हिंसा का सामना कर रही महिलाओं को सहायता प्रदान की जाती है। इतना ही नहीं इस हिंसा से ग्रस्त महिलाओं को चिकित्सा, कानूनी, मनोवैज्ञानिक और परामर्श सहित अन्य सहायता भी दी जाती हैं।ये योजना महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ योजना - लड़कियों के कल्याण और उनकी पढ़ाई के प्रति लोगों के बीच जागरूकता पैदा करने के लक्ष्य से बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ योजना को शुरू करा गया था। साल 2015 में इस योजना की चलाया गया था। इस योजना के जरिए लड़कियों के परिवार वालों को उन्हें शिक्षित करने के लिए प्रोत्सहित किया जाता है।कार्य महिला छात्रावास योजना -जो महिलाएं अपने परिवार से दूर रहकर कार्य कर रही हैं, उन महिलाओं के लिए इस योजना को शुरू किया गया है। इस योजना के अंतर्गत कोई भी कामकाजी महिला को रहने की सुविधा सरकार द्वारा मुहैया कराई जाती है। महिला बिना किसी डर के सरकार द्वारा खोले गए इन छात्रावास में रहकर अपनी नौकरी जारी रख सकती हैं।महिला हेल्पलाइन योजना -साल 2015 में शुरू की गई इस योजना को हिंसा से प्रभावित महिलाओं के लिए बनाया गया है।इस योजना की मदद से घरेलू हिंसा से प्रभावित कोई भी महिला 24 घंटे टोल-फ्री टेलीकॉम सेवा पर फोन कर मदद मांग सकती है ।
राजीव गांधी राष्ट्रीय आंगनवाड़ी योजना -ऑफिसों में काम करने वाली माताओं के लिए इस योजना को चलाया गया है। अक्सर कामकाजी महिलाएं अपने बच्चों को लेकर परेशान रहती हैं। इस योजना के जरिए कामकाजी महिलाएं अपने बच्चों को नर्सरी में छोड़ सकती हैं। जहां पर उनके बच्चों की देखभाल की जाएगी।वहीं शाम को अपना काम खत्म करके महिलाएं अपने बच्चों को वापस अपने साथ घर ले जा सकती हैं. देखभाल की सुविधा के अलावा इन नर्सरियों में बच्चों को बेहतर पोषण, प्रतिरक्षण सुविधाओं, सोने के लिए सुविधा और इत्यादि सुविधा प्रदान की जाती हैं।

 महिला सशक्तिकरण में ये ताकत है कि वो समाज और देश मे बहुत कुछ बदला जा सकता है वो समाज में किसी समस्या को पुरुषों से बेहतर ढ़ंग से निपट सकती है। वो देश और परिवार के लिये अधिक जनसंख्या के नुकसान को अच्छी तरह से समझ सकती है। अच्छे पारिवारिक योजना से वो देश और परिवार की आर्थिक स्थिति का प्रबंधन करने में पूरी तरह से सक्षम है। पुरुषों की अपेक्षा महिलाएँ किसी भी प्रभावकारी हिंसा को संभालने में सक्षम है चाहे वो पारिवारिक हो या सामाजिक।

बेहतर भारत के निर्माण में महिला सशक्तिकरण का अपना विशिष्ट स्थान है जिसे समझना अत्यंत आवश्यक है। खैर ! वर्तमान की केंद्र सरकार इस मुद्दे पर लगातार बेहतर कार्य कर रही है फिर भी सरकारों के साथ प्रत्येक भारतीय का यह कर्तव्य बनता है कि वह नए भारत के निर्माण में महिलाओं के समान व विकास के लिए कार्य करे तभी सार्थकता सम्भव है।

- शौकत

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