हमारे इर्दगिर्द का माहौल

स्वयं के इर्दगिर्द के माहौल से भी बचना बहुत जरूरी रहता हैं मानसिक रुप से भी और शारीरिक रुप से क्योंकी आप उसके कभी भी शिकार हो सकते हो जिससे उबरना इस दौर में नामुमकिन है।आपके पास जो हिंसक व असवैधानिक लोग रहते है उनका एक ही नजरिया होता है,वो किसी एक विशेष के भक्त बने रहते है उनकी मानसिक असमझ राष्ट्र से पहले स्वयं के बारे सोचती है तभी वो भक्तिअधीनता के शिकार होते है।

वर्तमान में जिम्मेदारी व कर्तव्यपरायणता मानसिक दिवालियापन के शिकार में है और व्यक्ति को पक्का-पकाया माल चाहिए क्योंकि वो सोशल मीडिया पे अंधाधुंध शेयर कर सके।

खैर : ऐसे लोगो को देश का ईमान व बौद्धिकता नही बख्शती, चाहे वो सोने के सिहांसन पे क्यो न हो। चौकन्ने और कर्तव्यपरायण बने।

Post a Comment

0 Comments