मर्कज और कोरोना...

मर्कज और कोरोना...

निजामुद्दीन थाना क्षेत्र  स्थित तब्लीगी जमात के मर्कज़  का मामला बहुत ही गम्भीर है.बड़ी चूक और नासमझी दोनों को जिम्मेदार ठहराना अत्ति-आवश्यक है..

मरकज़ में तब्लीगी जमात के ठहरने वाले लोगो ...!!

तुम कौनसे परवरदिगार को खुश व अपनी कहानियाँ सुनाने में व्यस्त थे?तुम्हारा परवरदिगार कौन है? तुम्हारी बेशर्मी और धोखाबरदारी ने इस देश को सोचने पर मजबूर कर दिया है. देश संकट की चरम अवस्था पे है जहां हर कोई धर्म से परे जाकर इंसानियत की अस्मिता को आबाद रखते हुए देश को खुशहाल रखना चाहता है,इसी बीच तुम्हारी यह ख़लल तुम्हें ज़ाहिल और बेशर्मी कहने से नही रोक पाएगी,शिया-सुन्नी की कट्टरपंथी लड़ाई में तुमनें देश को भी बदनाम करने की कोशिश की,यह तुम्हारी बरसो से आ रही इबादत को शून्य करती है.इबादत तो हम भी करते है ना ईमान और वतन के साये में...!!

तुम्हें तुम्हारा परवरदिगार माफ नही करेगा,देश तुम्हे सनसनी निग़ाहों से देखेगा, कारण बार-बार आएगा क्यो?

तुमनें काबे के तवाफ़ के रोके जाने को नकारा है,तुमने मदीने की भीड़ का कम होने को नकारा है तुमने चीन व इटली की मौतों को नकारा है तुमने भारत की संवेदनशीलता और सद्भावना को नकारा है...

मीडिया ! को नई इबादत मिल गयीं और हम सब इसी में उलझा दिये जायेंगे कि हर मुस्लिम शक के दायरे में है,कतई नही!! अभी कीचड़ छन्न रहा है,असल ईमान बाकी है...

अपने धर्म के प्रति श्रद्धा,बीमारी से लड़ना,मुश्किल वक्त में एक साथ होना सभी एक साथ चलता है,ना कि एक को ज्यादा तरफ़दारी देना..

प्रशासन से ऐसी चूक क्यों हुई यह समझ मे नही आया कि इतने लोग मर्कज में जमा थे?😊
इस्लाम की माना हर फ़र्ज़ की हिफाज़त चाहे वो वतन का हो या फिर ईमान का !!
- शौक़त


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