शहीद की बेटी को कलेक्टर का खत


सुना है ! जब क़लम देश के लिए चलती है तो दूर-सुदूर तक दुआओं का सिलसिला शुरू हो जाता है...उसे बांधे रखना असम्भव है, शायद यह पहले से भी है और जारी भी रहेगा...
यूँही अपनी उम्दा साहित्यिक रचनाओं से लबालब एक प्रशासनिक व्यक्तित्व ने अपना साहित्यिक भाव एक शहीद(मुकुट बिहार मीणा)की बेटी आरु के प्रति दिखाया जो सलाम योग्य है। माँ भारती के शहीद जवान के ताबूत से लिपटे तिरँगे पर जब उनकी बेटी को अपनत्व के प्यार से दिखाया और बिठाया तो अबोध उस पर लेट गयी अपने पिता के छाये से बेख़बर आरु ने उस वक्त तनिक भी नही सोचा होगा कि अब उसके पापा इस दुनिया से हमेशा के लिए विदा हो गए, इस मासूमियत सोच के आगे सब ध्वस्त था...
आदरणीय सोनी सर आपकी जिंदादिली सवेंदनशीलता का सारा राष्ट्र कायल है, क्यों नही? होना भी चाहिए। आपकी लेखनी चिरनिद्रा में सोये जवान में जान तो नही डाल सकी परन्तु उस बिटिया के हौसलों को उड़ान दी, नतमस्तक ! हूँ आपकी लेखनी के समक्ष जो आपको आम से खास बनाती है,एक जिंदादिल इंसान के गुणों से रूबरू करवाती है ।
देश के लिए अपनी कुर्बानी और सर्वस्व न्योछावर करने वाला भारत माँ का वह लाल अंत तक आपको दुआएं देगा जब तक उनकी चिरनिद्रा पूर्ण विराम नही दे देती । बिटिया आरु का भविष्य सुखद बने अब यही उस पिता को सच्ची श्रद्धांजलि होगी,एक बेहतर कर्तव्य होगा सरकार का व प्रशासन का,वरन उसकी आने वाली जिंदगी के फ़लसफ़े व आपका ख़त आगे भी बिटिया आरु को आँसू से तरबतर करेगा जो स्वीकार्य नही है ।
आदरणीय Jitendra Kumar Soni सर वास्तव में आप सलाम योग्य हो ....!!
खैर ! स्वर्गीय मुकुट बिहार मीणा को अश्रुपूरित शब्दांजली बिटिया आरु के उज्ज्वल भविष्य की अनन्त शुभकामनाएं।
शहीदों की चिताओ पर लगेंगे हर वर्ष मेले
बाक़ी सभी मिटने वालों का यहीं निशां होगा।।
कतरन : शहीद की बेटी को आईएएस व झालावाड़ कलेक्टर द्वारा लिखित एक मार्मिक खत।😔
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Shoukat Ali Khan

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