थार : अपने जीवन के रंगों में

सुदूर गाँवो की अपनायणत के लिए हर लम्हा हमेशा से तरशता आया हैं। जीवन व प्रकृति ने हमे हमेशा सुंदर सन्देश दिए और वो भी समझते है कि इंसान हमसे मुहब्बत करता है, लगाव रखता है।  प्रकृति की जैसी मर्जी रही वैसा ही उसने व्यवहार किया कभी आनंद से भरपूर तो कभी चोट लगाकर।

मैं थार की बात कर रहा हूँ उस रेगिस्तान की जिसके गाँव एक कुनबा बनाते है उस कुनबे को बड़े स्तर पर 'थार' कहते हैं हम। इस पार की सरहदें हमेशा शांत रही है। पता नहीं क्यों? बड़ी समझदार हो गयी है यहाँ के लोगो के साथ रहकर।

थार की कहानी बरसों पहले धूलभरी थी,तपतिश को सुनकर शरीर के रोंगटे खड़े हो जाते थे,सरकारी फाइलों में काले पाणी की सजा के वास्ते थार था,पाणी की क़ीमत थार से महसूस की जाती थी। कोई परिंदा भी भूल से थार से  मुहब्बत नही करना चाहता था खैर इंसान तो बड़ी बात हो गयी। क़ुदरत के करिश्में भी रहे है इस थार पे,प्रकृति ने भयंकर अकाळ थोपा तो कभी बाढ़ का कहर। सब कुछ अनहोना ही था। दर्द से मारी-मारी पीढ़िया गुजर गयी।

ज्यों-ज्यों पीढ़िया बदली थार का भी रंग-रूप बदला। अब थार समझ चुका था कि मेरे कहर और तपतिश के चलते भी यहाँ के रहजन टस से मस नही हुए यह उनकी अपणायत व मुहब्बत का करम है। अपनी आबादी और आकार पे थार आज भी हुकूमत करता है, सरहदों की हिफाज़त से लेकर मानव को सुकून देने तक यह सब इस थार की फितरत रही है। थार व यहाँ के लोगो के मध्य का विश्वास हम सबके लिए प्रेरणादायक है।

आज नये परिवेश का थार संसाधनों से परिपूर्ण क्षेत्र है चाहे भौतिक संसाधन हो या जैविक। चहुँओर हरियाळी बढ़ने को बेताब है। थार के सब लोग मुहब्बत से रहना चाहते है, थार ने इस परंपरा को हमेशा से बनाये रखा है कुछ इंसानी दरिंदे थार के साथ वादाखिलाफी करके माहौल बिगाड़ने की फिराक में रहते है ऐसे चुटफुटिये अपने मंसूबों पे कभी कामयाब नही हो सके। क्योंकि थार का कानून यहां की मुहब्बत है और सजा यहाँ की तपतिश। अमन का पैगाम लिए थार अपनी सभ्यता और संस्कृति पे आज भी गुमान करता है। व्यवहार से परिपूर्ण यहाँ की तहज़ीब अनेक अन्य सभ्यताओं के लिए प्रेरणास्रोत रही है। राजस्थान के लिए भी यह सौभाग्य रहा कि उसकी थार जैसी संस्कृति और मिट्टी मिली है।

अतीत व भविष्य के बीच का थार आज अपनी स्वर्णिम पीढ़ी को देखने की फ़िराक में है। विश्वास है यहाँ के समझदार और भले माणस/ माडू अपने दायित्वबोध को भलीभांति निर्वहन करेंगे क्योंकि इनका कुनबा प्रगति करेगा।

"है तुझसे यह मुहब्बत
कि मेरा होना ही तेरे में है
एक रोज दफ़न हो जाएंगे
इसी जर्रे में,क्या होना है।

तेरे से शुरू हुए यह इब्तिदा
अब बस तेरे पे ही ख़त्म हो।"

© शौक़त

(फोटू - फोजी भाई गेनाराम जी)
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