चौहटन का चितेरे खेता जांगिड़ की कहानी

एक गाँव है चोहटन, जो बाड़मेर जिले में अवस्थित है वहाँ के खेता जांगिड़ नाम के एक कलाकार की अंगुलियों और हाथों में जिंदगी को हूबहू पन्नो पर उतारने की कला है। कला भी ऐसी की आनंद आ जाए...

थळवट धरा यानि कि थार में जीवन का असीम आनंद है,जिंदगी के रंग-रूप,संघर्ष और व्यक्तित्व निखार वहाँ मोती समान है। जिजीविषा और जिज्ञासा के इर्दगिर्द वहाँ का जीवन है।

वो कहते है कि "है भी क्या इन आड़ी-तिरछी लकीरों के सिवाय" वो खुद को इसी में ही आनंद की अनुभूति करते है। व्यक्ति को खुद का सन्तुष्ट होना जीवन का सबसे बड़ा आनंद है और वही कामयाबी की सच्चाइयाँ है।

मैं उनसे व्यक्तिगत तो नही मिला लेकिन उनकी बनाई पोर्टेट और अन्य तश्वीरें को देखकर ही उनके हुनर और उनके व्यक्तित्व के क़यास लगाता रहता हूँ। उनकी अंगुलियों की एक भाषा लगती है जिसके साये में वो रमते है। यह कला मात्र कुछ लोगो के पास होती है जिससे वो खुद के हुनर को ओर अधिक रंग देते है। कलाकृतियां स्वयँ व्यक्ति के हुनर का पैग़ाम देती है कि वो मुझसे कितना मुहब्बत करता है।

खेता जांगिड़ की अक्सर तश्वीरें अपनी संस्कृति से जुड़ी होती है जो उनका सबसे बड़ा कार्य है,अपनी तहज़ीब को जीवित रखने का इससे बड़ा और क्या माध्यम हो सकता है, वरन डीएसएलआर की दुनिया मे गूगल थार व उसकी संस्कृति की हजारों तश्वीरें सम्भाले रखा हुआ है। मजा तो तब है जब अपने ही हाथों से अपनी तहज़ीब की अस्मिता को दिल से लगाये और उसे अपनत्व महसुस कराए।

अनुभूति की पराकाष्ठा संघर्ष और हुनर में निहित है,खेता जांगिड़ जैसे हुनरमंद युवा को बड़ा मंच मिलना चाहिए और जिससे वे अपनी बेशुमार प्रतिभा व संस्कृति को लोगों के समक्ष पेश कर सके।


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