जिंदगी की असल सच्चाई यह है -
कि हम क़ामयाबी को स्वयं के हित से जोड़ते है अथार्त जहाँ हमारा हित हो, हमारी आशाएं और आकांक्षाए जुड़ी हुई हो इसी के इर्दगिर्द ही हम सफ़लता को जानते है और पहचानते है, यह इसकी समकालीन परिभाषा बन गयीं है.
जिंदगी के तत्व- परिवार, समाज और देश यह सभी कामयाबी के अंग हैं जिंदगी का, जिंदगी से और जिंदगी के लिए जीना ही क़ामयाबी की सही परिभाषा है. इनमें से एक को भी दरकिनार किया जाता हैं तो उसे सफ़लता का रंग नहीं दिया जा सकता, इन तीनों में सामंजस्य से ही हम कामयाबी से मुख़ातिब हो पाते हैं.
सनद रहें ! हित व सफ़लता का फासला बहुत बड़ा हैं हम हित यानि कि स्वयं के हित को तवज्जों देते हुए कामयाबी के गीत गा रहें हैं ...
-शौक़त

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